भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने माना है कि अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने आए हैं और यह टकराव अभी पूरी तरह ख़त्म नहीं हुआ है। बीबीसी हिंदी के कार्यक्रम “दिनभर” (23 अक्टूबर 2026) में इस बयान के मायने, सरकार की प्रतिक्रिया और विशेषज्ञों के विश्लेषण पर विस्तार से चर्चा हुई। यहाँ उस चर्चा के मुख्य बिंदु पढ़िए।
ITBP प्रमुख ने क्या कहा?
ITBP प्रमुख के मुताबिक़ चीन ने अपनी सेना और सीमा ढाँचे के आधुनिकीकरण पर भारी निवेश किया है। उन्होंने यह भी कहा कि ड्रोन जैसी नई तकनीकों ने युद्ध का स्वरूप बदल दिया है, जिनकी मदद से छोटे देश भी बड़े देशों का मुक़ाबला कर पा रहे हैं। सीमा पर तैनात बल के सबसे बड़े अधिकारी का यह खुला स्वीकार इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि अरुणाचल में तनाव पर आधिकारिक बयान अक्सर बहुत सीमित रहते हैं।
सरकार और विपक्ष की प्रतिक्रिया
बयान सामने आने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया और पूछा कि सीमा की असली स्थिति देश को क्यों नहीं बताई जा रही। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जब चीनी सैनिक तय गश्त के तरीक़ों से हटते हैं तो हालात बिगड़ते हैं। उनके अनुसार दोनों पक्ष कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों की व्यवस्थाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर समझ बेहतर करने पर बातचीत के लिए सहमत हुए हैं।
राहुल बेदी: “दक्षिण तिब्बत” का दावा और अक्टूबर का मौसम
रक्षा मामलों के जानकार राहुल बेदी ने याद दिलाया कि चीन लंबे समय से अरुणाचल को “दक्षिण तिब्बत” बताकर उस पर दावा करता रहा है। उनके मुताबिक़ सितंबर-अक्टूबर का समय पहाड़ों में सैन्य गतिविधि का मौसम माना जाता है; 1962 का युद्ध भी इसी समय हुआ था। बेदी का कहना है कि बुनियादी ढाँचे के साथ-साथ साइबर, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन क्षमता में चीन आगे है, और अब तक की बातचीत ज़्यादातर चीन की शर्तों पर हुई है।
उन्होंने यह भी बताया कि तीनों सेक्टरों में दोनों देशों ने कभी अपने-अपने नक़्शे औपचारिक रूप से एक-दूसरे को नहीं सौंपे, इसलिए “LAC कहाँ है” इस पर ही मतभेद बना रहता है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत दर्जनभर से ज़्यादा बार हो चुकी है। बेदी के अनुसार ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में क्वाड (Quad) भी पहले जितना असरदार नहीं रहा।
प्रो. अनुराधा चिनॉय: बातचीत कई दौर, हल नहीं
अंतरराष्ट्रीय संबंधों की विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर अनुराधा चिनॉय के मुताबिक़ गलवान के बाद से दोनों देशों के बीच 25 से ज़्यादा दौर की बातचीत हो चुकी है, फिर भी अरुणाचल का मसला अटका हुआ है। उन्होंने चीन की रणनीति को “आगे बढ़ो-पीछे हटो” वाली ग्रे-ज़ोन रणनीति बताया, जिसमें खुला युद्ध किए बिना दबाव बनाए रखा जाता है।
चिनॉय ने आर्थिक पहलू की ओर भी ध्यान दिलाया: भारत एंटीबायोटिक दवाओं के कच्चे माल और रेयर अर्थ जैसी चीज़ों के लिए अब भी चीन पर निर्भर है, जबकि संवेदनशील तकनीक में चीनी निवेश पर भारत ने पाबंदियाँ लगा रखी हैं। उनका मानना है कि सीमा विवाद का स्थायी हल राजनीतिक इच्छाशक्ति से ही निकलेगा, जैसे चीन और रूस ने उस्सुरी नदी क्षेत्र का विवाद सुलझाया था, और युद्ध के बजाय कूटनीति ही रास्ता है।
दिनभर की दूसरी बड़ी ख़बरें
हेब्रोन में गोलीबारी
वेस्ट बैंक के हेब्रोन में हुई गोलीबारी में पाँच इसराइली घायल हुए। यह घटना इसराइल में होने वाले चुनावों से पहले हुई है।
तिब्बत में भूकंप
तिब्बत में 7 तीव्रता के भूकंप में कम से कम 16 लोगों की मौत हुई और 60 से ज़्यादा लोग घायल हुए।
ताइवान में तूफ़ान
ताइवान में आए तूफ़ान से एक व्यक्ति की मौत हुई और एक हज़ार से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचाया गया।
यूक्रेन में स्टारलिंक
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि इलॉन मस्क ने पाबंदियाँ हटा दी हैं, लेकिन यूक्रेन में स्टारलिंक सेवा में रुकावट की ख़बरें अब भी आ रही हैं।
यमन के पास नाव हादसा
यमन के पास हुए एक नाव हादसे में सवार सभी 14 भारतीय सुरक्षित हैं। भारतीय दूतावास ने इसकी पुष्टि की है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ITBP प्रमुख ने अरुणाचल को लेकर क्या कहा?
ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा कि अरुणाचल में कई जगह भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने आए और यह टकराव अब भी जारी है।
भारत सरकार ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीनी सैनिकों के तय गश्त पैटर्न से हटने पर हालात बिगड़ते हैं, और दोनों देश LAC पर समझ बेहतर करने के लिए बातचीत पर सहमत हुए हैं।
चीन अरुणाचल पर दावा क्यों करता है?
चीन अरुणाचल प्रदेश को “दक्षिण तिब्बत” बताता है। भारत इस दावे को ख़ारिज करता है और अरुणाचल को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है।
स्रोत: यह रिपोर्ट बीबीसी हिंदी के कार्यक्रम “दिनभर” (23 अक्टूबर 2026) पर आधारित है। प्रस्तुति: South Asian Report.



