बीबीसी दुनिया राउंडअप: फिर युद्ध की कगार पर ईरान-इजराइल, उत्तर कोरिया में शी जिनपिंग और वैश्विक हलचल

बीबीसी दुनिया राउंडअप: फिर युद्ध की कगार पर ईरान-इजराइल, उत्तर कोरिया में शी जिनपिंग और वैश्विक हलचल

दुनियाभर में कूटनीतिक और रणनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। एक तरफ जहां मिडिल ईस्ट में सीजफायर के बाद फिर से मिसाइलें बरसने लगी हैं, वहीं दूसरी तरफ उत्तर कोरिया और चीन के बीच नजदीकियों का एक नया दौर शुरू हो चुका है। आइए नजर डालते हैं आज की बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबरों पर।


१. ईरान और इजराइल: सीजफायर के बाद फिर खुली जंग की कगार पर

अप्रैल में हुए नाजुक सीजफायर के बाद पहली बार ईरान और इजराइल ने एक-दूसरे पर सीधे मिसाइल हमले किए हैं। रविवार रात उत्तरी इजराइल पर ईरान की तरफ से भारी मिसाइलें दागी गईं, जिसके जवाब में इजराइली सेना (IDF) ने ईरान के पश्चिमी और केंद्रीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

  • तनाव की वजह: ईरान का आरोप है कि इजराइल ने लेबनान में सीजफायर का बार-बार उल्लंघन किया, जिसके जवाब में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने इजराइल के दो एयरबेस और हाइफा में एक पेट्रोकेमिकल प्लांट पर हमले किए।
  • इजराइल का दावा: इजराइली सेना ने कहा कि उन्होंने अधिकांश ईरानी मिसाइलों को हवा में ही इंटरसेप्ट (नष्ट) कर दिया है। ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफिन के अनुसार, इजराइली सेना लेबनान और हिजबुल्लाह के खिलाफ अपने ऑपरेशन और तेज करेगी।
  • क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल: मिडिल ईस्ट में बढ़े इस तनाव के कारण वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 5% से ज्यादा बढ़कर लगभग $100 प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।
  • डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों पक्षों से तुरंत हमले रोकने की अपील की है। उन्होंने कहा कि एक परमानेंट पीस डील बहुत करीब है, लेकिन “नासमझी” इसके आड़े आ रही है।

“मिडिल ईस्ट में इस वक्त जो उथल-पुथल मची है, उसके नतीजे आने वाले कई दिनों या हफ्तों में नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी के बाद तक दिखाई देंगे।” — जेरेमी बोवेन, इंटरनेशनल एडिटर, बीबीसी


२. शी जिनपिंग का उत्तर कोरिया दौरा: क्या हैं नए कूटनीतिक मायने?

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद दो दिन के दौरे पर उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग पहुंचे, जहां किम जोंग उन और उनकी पत्नी ने उनका भव्य रेड कारपेट स्वागत किया।

  • बदलते समीकरण: हाल के दिनों में उत्तर कोरिया की रूस से नजदीकियां काफी बढ़ी हैं। ऐसे में चीन इस क्षेत्र में अपना रणनीतिक प्रभाव बनाए रखना चाहता है।
  • किम जोंग उन का मकसद: जानकारों के मुताबिक, किम जोंग उन इस दौरे का इस्तेमाल चीन से कुछ बड़ी रियायतें हासिल करने, सीमा पार व्यापार बढ़ाने और उत्तर कोरियाई स्की-रिसॉर्ट्स के लिए चीनी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कर सकते हैं।

३. यूक्रेन युद्ध: रूसी सेना में धोखे से भर्ती हुए ३,००० अफ्रीकी लड़ाके

यूक्रेन सरकार के हवाले से एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है कि रूसी सेना में इस वक्त करीब 3,000 अफ्रीकी फाइटर्स शामिल हैं।

इनमें से अधिकांश युवाओं को अवैध रिक्रूटमेंट एजेंसियों ने रूस में अच्छी नौकरी और मोटी तनख्वाह का लालच देकर गुमराह किया और जबरन यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के मैदान में झोंक दिया। कई लड़ाके अब यूक्रेन में युद्धबंदी (POWs) के रूप में फंसे हुए हैं और अपने देश वापस लौटने की गुहार लगा रहे हैं।


४. ग्लोबल क्विक राउंडअप: दुनिया की अन्य बड़ी खबरें

देश/क्षेत्रमुख्य अपडेट
फिलीपींस (मिंडानाओ)7.8 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप में कम से कम 32 लोगों की मौत और 120 से अधिक घायल। कई इलाकों में सुनामी की चेतावनी।
अर्मेनियारूस के भारी दबाव के बावजूद पश्चिमी देशों के समर्थक प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान ने अहम राष्ट्रीय चुनावों में जीत हासिल की।
यूक्रेन सेना का दावायूक्रेन के सैन्य चीफ के मुताबिक, उन्होंने इस साल रूस के कब्जे से अपना 600 वर्ग किमी इलाका वापस छुड़ा लिया है। पिछले दो साल में ऐसा पहली बार हुआ है।

५. भूमध्य सागर में दिखी दुर्लभ ‘ग्रेट वाइट शार्क’

मेडिटेरेनियन सी (भूमध्य सागर) में डूबे हुए एक जहाज से मछली पकड़ने का जाल हटा रहे गोताखोरों (Divers) को पानी के नीचे एक विशाल ग्रेट वाइट शार्क दिखाई दी। यह जीव इस क्षेत्र में विलुप्त होने की कगार पर है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस फुटेज के बाद सरकारें इन समुद्री जीवों को बचाने के लिए “प्रोटेक्टेड समुद्री एरिया” बनाने की दिशा में कदम उठाएंगी।

६. साओ पाउलो में ३०वीं प्राइड परेड का आयोजन

ब्राजील के साओ पावलो में मशहूर पलिस्टा एवेन्यू पर 30वीं एलजीबीटीक्यू+ (LGBTQ+) प्राइड परेड का शानदार और रंगीन आयोजन किया गया। इस साल की थीम “द स्ट्रीट कॉल्स, द बैलेट बॉक्स कंफर्म्स” रखी गई थी, जिसका सीधा उद्देश्य चुनावी साल में राजनीतिक भागीदारी और अपने अधिकारों की रक्षा करना था।


आपकी क्या राय है? मिडिल ईस्ट के इन बिगड़ते हालातों और वैश्विक कूटनीति पर आप क्या सोचते हैं? हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं!

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